सूरह यासीन
हिंदी तर्जुमा
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
ईमान
अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला।
इरफ़ान
अल्लाह के नाम से शुरू, जो निहायत मेहरबान, रहमत वाला है।
1
यासीन
ईमान
यासीन
इरफ़ान
यासीन
2
वल क़ुर आनिल हकीम
ईमान
हिकमत वाले क़ुरआन की क़सम
इरफ़ान
हिकमत वाले क़ुरआन की क़सम
3
इन्नका ल-मिनल मुरसलीन
ईमान
बेशक तुम
इरफ़ान
बेशक तुम रसूलों में से हो
4
अला सिरातिम मुस्तक़ीम
ईमान
सीधी राह पर भेजे गए हो
इरफ़ान
सीधी राह पर हो
5
तनज़ीलल अज़ी-ज़िर रहीम
ईमान
इज़्ज़त वाले मेहरबान का उतारा हुआ
इरफ़ान
इज़्ज़त वाले मेहरबान का उतारा हुआ
6
लितुन ज़िरा क़उमम मा उनज़िरा आबा-उहुम फहुम ग़ाफ़िलून
ईमान
ताकि तुम उस क़ौम को डर सुनाओ जिस के बाप दादा ना डराए गए तो वो बे ख़बर हैं
इरफ़ान
ताकि तुम उस क़ौम को डराओ जिसके बाप-दादा को न डराया गया, तो वह ग़फ़लत में पड़े हुए हैं
7
लक़द हक़ क़ल क़उलु ‘अला अक-सरिहिम फ़हुम ला युअ’मिनून
ईमान
बेशक, उन में अक्सर पर बात साबित हो चुकी है तो वो ईमान ना लाएंगे
इरफ़ान
बेशक उन में अक्सर पर बात साबित हो चुकी है, तो वह ईमान न लाएँगे
8
इन्ना ज’अल्ना फ़ी आ’ना क़िहिम अग़लालन फ़हिया इलल अजक़ानि फ़हुम मुक़महून
ईमान
हमने उन की गर्दनों में तौक़ कर दिए हैं के वो ठोड़ियों तक हैं तो ये अब ऊपर को मुँह उठाए रहे गए
इरफ़ान
हम ने उन की गर्दनों में तौक़ डाल दिए हैं, तो वह ठोड़ियों तक हैं, तो वह ऊपर को मुँह उठाए हुए हैं
9
व ज’अल्ना मिम बइनि अइदीहिम सद्दउँ व-मिन ख़लफ़िहिम सद्दन फ़अग शइनाहुम फ़हुम ला युबसिरून
ईमान
और हमने उन के आगे दीवार बना दी और उन के पीछे एक दीवार और उन्हें ऊपर से ढांक दिया तो उन्हें कुछ नहीं सूझता
इरफ़ान
और हम ने उन के आगे दीवार बना दी और उन के पीछे (भी) एक दीवार (बना दी), फिर उन्हें ऊपर से (भी) ढाँक दिया, तो उन्हें कुछ दिखाई नहीं
10
व-सवाउन अलइहिम अअनज़र तहुम अम लम तुनज़िरहुम ला युअ’मिनून
ईमान
और उन्हें एक सा है, तुम उन्हें डराओ या ना डराओ, वो ईमान लाने के नहीं
इरफ़ान
और तुम्हारा उन्हें डराना और न डराना उन पर बराबर है, वह ईमान नहीं लाएँगे
11
इन्नमा तुन्ज़िरू मनित त-ब’अज़ ज़िकरा व-खशियर रहमा न बिल्गइबि फ़बश शिरहु बिमग़ फ़ि-रतिउं व-अजरिन करीम
ईमान
तुम तो उसी को डर सुनाते हो जो नसीहत पर चले, और रहमान से बे देखे डरे तो उसे बख़्शिश और इज़्ज़त के सवाब की बशारत दो
इरफ़ान
तुम तो सिर्फ उसे डराते हो जो नसीहत की पैरवी करे और रहमान से बग़ैर देखे डरे, तो उसे बख़्शिश और इज़्ज़त के सवाब की बशारत दो
12
इन्ना नहनु नुहयिल मउता वनकतुबु मा क़द्दमु व-आसा रहुम, वकुल्ला शइ- इन अहसइ नाहु फ़ी इमामिम मुबीन
ईमान
बेशक हम मुर्दों को जिलाएं (या’नी ज़िंदा करें) और हम लिख रहे हैं जो उन्होंने आगे भेजा, और जो निशानियां पीछे छोड़ गए, और हर चीज़ हमने गिन रखी है एक बताने वाली किताब में
इरफ़ान
बेशक हम मुर्दों को ज़िन्दा करेंगे और हम लिख रहे हैं जो (अमल) उन्होंने आगे भेजा और उनके पीछे छोड़े हुए निशानों को, और एक ज़ाहिर कर देने वाली किताब में हर चीज़ हम ने शुमार कर रखी है
13
वद रिब लहुम म-सलन असहाबल क़रयह इज़ जा अहल मुरसलून
ईमान
और उनसे मिसाल बयान करो इस शहर वालों की, जब उनके पास फ़रिश्ते आए
इरफ़ान
और उन से शहर वालों की मिसाल बयान करो, जब उन के पास रसूल आए
14
इज़ अरसलना इलइहिमुस नइ नि फ़कज ज़बूहुमा फ़’अज़ ज़ज़ना बिसा लिसिन फ़क़ालू इन्ना इलइकुम मुरसलून
ईमान
जब हमने उन की तरफ़ दो भेजे, फिर उन्होंने उन को झुठलाया तो हमने तीसरे से ज़ोर दिया अब उन सब ने कहा, बेशक हम तुम्हारी तरफ़ भेजे गए हैं
इरफ़ान
जब हम ने उन की तरफ़ दो रसूल भेजे, फिर उन्होंने उन को झुठलाया, तो हम ने तीसरे के ज़रिये मदद की, तो उन सब ने कहा कि बेशक हम तुम्हारी तरफ़ भेजे गए हैं
15
क़ालू मा अन्तुम इल्ला ब-शरुम मिसलुना, वमा अनज़लर रहमानु मिन शइ-इन इन अन्तुम इल्ला तकज़िबून
ईमान
बोले तुम तो नहीं मगर हम जैसे आदमी, और रहमान ने कुछ नहीं उतारा तुम निरे झूठे हो
इरफ़ान
लोगों ने कहा: तुम तो हमारे जैसे आदमी हो और रहमान ने कोई चीज़ नहीं उतारी, तुम सिर्फ़ झूठ बोल रहे हो
16
क़ालू रब्बुना या’लमु इन्ना इलइकुम लमुरसलून
ईमान
वो बोले, हमारा रब जानता है के बेशक ज़रूर हम तुम्हारी तरफ़ भेजे गए हैं
इरफ़ान
रसूलों ने कहा: हमारा रब जानता है कि बेशक ज़रूर हम तुम्हारी तरफ़ भेजे गए हैं
17
वमा अलइना इल्लल बलागुल मुबीन
ईमान
और हमारे ज़िम्मे नहीं मगर साफ़ पहुंचा देना
इरफ़ान
और हमारे ज़िम्मे सिर्फ़ साफ़ साफ़ तबलीग़ कर देना ही है
18
क़ालू इन्ना त-तय्यरना बिकुम लइल लम तनतहू लनर जुमन्नकुम वला यमस सन्नकुम मिन्ना अज़ाबुन अलीम
ईमान
बोले, हम तुम्हें मनहूस समझते हैं। बेशक, अगर बाज़ ना आए तो ज़रूर हम तुम्हें संगसार करेंगे बेशक, हमारे हाथों तुम पर दुख की मार पड़ेगी
इरफ़ान
लोगों ने कहा: हम तुम्हें मनहूस समझते हैं। बेशक अगर तुम बाज़ न आए तो ज़रूर हम तुम्हें संगसार करेंगे और ज़रूर तुम्हें हमारी तरफ़ से दर्दनाक सज़ा पहुँचेगी
19
क़ालू ताइरुकुम म-‘अकुम अइन ज़ुक्किर-तुम बल-अन्तुम क़उमूम मुसरिफ़ून
ईमान
उन्होंने फ़रमाया, तुम्हारी नहूसत तो तुम्हारे साथ है | क्या इस पर बिदकते हो के तुम समझाए गए बल्कि तुम हद से बढ़ने वाले लोग हो
इरफ़ान
तुम्हारी मनहूसियत तो तुम्हारे साथ है। क्या अगर तुम्हें नसीहत की जाए (तो तुम उसे बदशगुनी कहते और इंकार करते हो), बल्कि तुम हद से बढ़ने वाले लोग हो
20
वजा अ मिन-अक्सल मदी-नति रजुलुइं यस’आ, क़ाला या क़उमित तबि’उल मुरसलीन
ईमान
और शहर के परले किनारे से एक मर्द दौड़ता आया बोला, ऐ मेरी क़ौम, भेजे हुए लोगों की पैरवी करो
इरफ़ान
और शहर के दूर के किनारे से एक मर्द दौड़ता हुआ आया, उसने कहा: ऐ मेरी क़ौम! इन रसूलों की पैरवी करो
21
इत तबि’ऊ मल-ला यसअलुकुम अजरऊं वहुम मुहतदून
ईमान
ऐसों की पैरवी करो जो तुमसे कुछ बदला नहीं मांगते, और वो राह पर हैं
इरफ़ान
ऐसों की पैरवी करो जो तुम से कोई मुआवज़ा नहीं माँगते और वह हिदायत-याफ़्ता हैं
22
वमालिया ला अ’बुदुल लज़ी फ़त-रनी व इलैहि तुरजऊन
ईमान
और मुझे क्या है के इस की बंदगी ना करूं जिसने मुझे पैदा किया और उसी की तरफ़ तुम्हें पलटना है
इरफ़ान
और मुझे क्या है कि मैं उसकी इबादत न करूँ जिसने मुझे पैदा किया, और उसी की तरफ़ तुम लौटाए जाओगे
23
अ अत्तखिज़ु मिन दुनिही आलिहतन इय युरिदनिर रहमानु बिदुर-रिल ला-तुगनि अन्नी शफ़ा अतुहुम शय अउं वला यूनक़िज़ून
ईमान
क्या अल्लाह के सिवा और ख़ुदा ठहराऊं, के अगर रहमान मेरा कुछ बुरा चाहे तो उनकी सिफ़ारिश मेरे कुछ काम ना आए, और ना वो मुझे बचा सकें
इरफ़ान
क्या मैं अल्लाह के अलावा और माबूद बना लूं कि अगर रहमान मुझे कोई नुकसान पहुंचाना चाहे तो इन की सिफारिश मुझे कोई फायदा न दे और न वो मुझे बचा सकें
24
इन्नी इज़ल लफी दलालिम मुबीन
ईमान
बेशक, जब तू मैं खुली गुमराही में हूं
इरफ़ान
बेशक जब तो मैं खुली गुमराही में होऊंगा
25
इन्नी आमन्तु बि-रब्बिकुम फ़समऊन
ईमान
मुक़र्रर (यक़ीनन) मैं तुम्हारे रब पर ईमान लाया तो मेरी सुनो
इरफ़ान
बेशक मैं तुम्हारे रब पर ईमान लाया तो तुम मेरी सुनो
26
क़ीलद खुलिल जन्नह, क़ा-ल यालइ-त क़उमिइं यअ’लमून
ईमान
इस से फ़रमाया गया के जन्नत में दाख़िल हो कहा किसी तरह मेरी क़ौम जानती
इरफ़ान
(उससे) फ़रमाया गया कि तू जन्नत में दाखिल हो जा, उसने कहा: ऐ काश कि मेरी क़ौम जान लेती।
27
बिमा गफ़-रली रब्बी व-ज’अलनी मिनल मुकरमीन
ईमान
जैसी मेरे रब ने मेरी मग़फिरत की और मुझे इज़्ज़त वालों में किया
इरफ़ान
जैसी मेरे रब ने मेरी मग़फ़िरत की और मुझे इज़्ज़त वालों में शामिल किया
28
वमा अन्ज़लना ‘अला क़उमिही मिन ब’दिही मिन जुन्दिम मिनस समाइ वमा कुन्ना मुनज़िलीन
ईमान
और हमने उस के बाद उस की क़ौम पर आसमान से कोई लश्कर ना उतारा, और ना हमें वहां कोई लश्कर उतारना था
इरफ़ान
और हमने उसके बाद उसकी क़ौम पर आसमान से कोई लश्कर न उतारा और न हम (वहां कोई लश्कर) उतारने वाले थे
29
इन कानत इल्ला सइहतउँ वाहि-दतन फ़इज़ा हुम् ख़ामिदून
ईमान
वो तो बस एक ही चीख़ थी जभी वो बुझ कर रह गए
इरफ़ान
वो सिर्फ एक चीख़ थी तो जभी वो बुझ कर रह गए
30
या हसरतन ‘अलल ‘इबाद, मा य’तीहिम मिर रसूलिन इल्ला कानू बिही यस तहज़िऊन
ईमान
और कहा गया है के हाय अफ़सोस! इन बंदों पर, जब उन के पास कोई रसूल आता है तो उस से ठट्ठा ही करते हैं
इरफ़ान
(और कहा गया कि) हाए अफ़सोस उन बंदों पर कि उनके पास कोई रसूल आता है तो उससे ठट्ठा मज़ाक ही करते हैं
31
अलम यरउ कम अहलक-ना क़ब्लहुम मिनल कुरूनि अन्नहुम इलइहिम ला यर जिऊन
ईमान
क्या उन्होंने ना देखा, हमने उनसे पहले कितनी संगतें हलाक फ़रमाईं के वो अब उन की तरफ़ पलटने वाले नहीं
इरफ़ान
क्या उन्होंने न देखा कि हमने उनसे पहले कितनी क़ौमें हलाक कर दीं कि वो अब उनकी तरफ़ पलटने वाले नहीं
32
वइन कुल्लुल लम्मा जमी’उल लदइना मुह्दरुन
ईमान
और जितने भी हैं सब के सब हमारे हुज़ूर हाज़िर लाए जाएंगे
इरफ़ान
और जितने भी हैं सब के सब हमारे हुज़ूर हाज़िर किए जाएंगे
33
व आयतुल लहुमूल अरदुल मइततु अह यइनाहा व अख़रजना मिन्हा हब्बन फ़मिनहु यअ’ कुलून
ईमान
और उन के लिए एक निशानी मुर्दा ज़मीन है, हमने उसे ज़िंदा किया और फिर उस से अनाज निकाला, तो उस में से खाते हैं
इरफ़ान
और उनके लिए एक निशानी मुर्दा ज़मीन है हमने इसे ज़िंदा किया और इससे अनाज निकाला तो उसमें से वो खाते हैं
34
व जअलना फ़ीहा जन्नातिम मिन नखीलिउँ व आ’नाबिउँ व फ़ज्जरना फ़ीहा मिनल उयून
ईमान
और हमने उस में बाग़ बनाए, खजूरों और अंगूरों के, और हमने उस में कुछ चश्मे बहाए
इरफ़ान
और हमने उसमें खजूरों और अंगूरों के बाग़ बनाए और हमने उसमें कुछ चश्मे (झरने) बहाए
35
लियअ’ कुलु मिन स-मरिही वमा ‘अमिलत हु अइदीहिम अ-फला यशकुरून
ईमान
के इस के फलों में से खाएं, और ये उन के हाथ के बनाए नहीं तो क्या हक़ नहीं मानेंगे
इरफ़ान
ताकि लोग इसके फलों में से खाएं और यह उनके हाथों ने नहीं बनाए तो क्या वो शुक्र अदा नहीं करेंगे?
36
सुब्हानल लज़ी ख़-लक़ल अज़वा-ज कुल्लहा मिम मा तुमबितुल अरदु वमिन अनफुसिहिम वमिम मा ला या’लमून
ईमान
पाकी है उसे जिसने सब जोड़े बनाए इन चीज़ों से जिन्हें ज़मीन उगाती है, और ख़ुद उन से और उन चीज़ों से जिन की उन्हें ख़बर नहीं
इरफ़ान
पाक है वो जिसने सब जोड़े बनाए, ज़मीन की उगाई हुई चीज़ों से और लोगों से और उन चीज़ों से जिन्हें वो जानते भी नहीं हैं
37
व आयतुल लहुमूल लइलु नसलखु मिन्हुन नहारा फइज़ा हुम् मुजलिमून
ईमान
और उनके लिए एक निशानी रात है, हम उस पर से दिन खींच लेते हैं जभी वो अंधेरे में हैं
इरफ़ान
और उनके लिए एक निशानी रात है हम उस पर से दिन को खींच लेते हैं तो जभी वो अंधेरों में रह जाते हैं
38
वश शमसु तजरी लिमुस तक़र-रिल लहा ज़ालिका तक़्दीरूल अज़ीज़िल ‘अलीम
ईमान
और सूरज चलता है अपने एक ठहराओ के लिए , ये हुक्म है ज़बरदस्त ‘इल्म वाले का
इरफ़ान
और सूरज अपने ठहरने के वक़्त तक चलता रहेगा, यह ज़बरदस्त, इल्म वाले का मुक़र्रर किया हुआ है
39
वल क़मर क़द्दरनाहु मनाज़िला ‘हत्ता ‘आद कल ‘उरजुनिल क़दीम
ईमान
और चांद के लियें हमने मंज़िलें मुक़र्रर कीं, यहाँ तक के फिर हो गया जेसे खजूर की पुरानी डाल(या’नी टहनी
इरफ़ान
और चांद के लिए हमने मंज़िलें मुक़र्रर कीं यहाँ तक कि वो खजूर की पुरानी शाख़ जैसा हो जाता है
40
लश शम्सु यमबगी लहा अन तुद रिकल क़-मरा वलल लइलु साबिक़ुन नहारि वकुल्लुन फी फ़ल-किय्ंयसबहून
ईमान
सूरज को नहीं पहुंचता के चाँद को पकड़ ले और ना रात दिन पर सबक़त ले जाए, और हर एक एक घेरे में पैर रहा है
इरफ़ान
सूरज को लायक़ नहीं कि चांद को पकड़े और न रात दिन पर सबक़त ले जाने वाली है और हर एक एक दायरे में तैर रहा है
41
व आयतुल लहुम अन्ना ‘हमल्ना ज़ुर रिय य-तहूम फ़िल फ़ुल्किल मशहून
ईमान
और उन के लिए एक निशानी ये है के उन्हें उन के बुज़ुर्गों की पीठ में हमने भरी कश्ती में सवार किया
इरफ़ान
सूरज को लायक़ नहीं कि चांद को पकड़े और न रात दिन पर सबक़त ले जाने वाली है और हर एक एक दायरे में तैर रहा है
42
व ख़लकना लहुम मिम मिस्लिही मा यरकबून
ईमान
और उन के लिए वैसी ही कश्तियां बनादीं जिन पर सवार होते हैं
इरफ़ान
और हमने उनके लिए वैसी ही कश्तियाँ बना दीं जिन पर सवार होते हैं
43
वइन नश नुग़रिक़ हुम फ़ला सरी-ख लहुम वला हुम युन्क़दून
ईमान
और हम चाहें तो उन्हें डुबो दें तो ना कोई उनकी फ़रियाद को पहुंचने वाला हो और ना वो बचाए जाएं
इरफ़ान
और अगर हम चाहें तो उन्हें डबो दें तो न कोई उनकी फ़रियाद को पहुँचने वाला हो और न उन्हें बचाया जाए
44
इल्ला रहमतम मिन्ना व-मताअन इलाहीन
ईमान
मगर हमारी तरफ़ की रहमत और एक वक़्त तक बरतने देना
इरफ़ान
मगर हमारी तरफ़ से रहमत और एक वक़्त तक फ़ायदा उठाने (की मोहलत हो)
45
वइजा क़ी-ल लहुमुत तक़ू मा बइना अइदीकुम वमा ख़ल्फकुम लअल्लकुम तुरहमून
ईमान
और जब उन से फ़रमाया जाता है डरो, तुम इस से जो तुम्हारे सामने है और जो तुम्हारे पीछे आने वाला है इस उम्मीद पर के तुम पर मेहर हो, तो मुँह फेर लेते हैं
इरफ़ान
और जब उन से फ़रमाया जाता है, डरो उस से जो तुम्हारे सामने है और जो तुम्हारे पीछे आने वाला है इस उम्मीद पर कि तुम पर रहम किया जाए
46
वमा त’तीहिम मिन आयतिम मिन आयाति रब्बिहिम इल्ला कानू ‘अन्हा मु’रिदीन
ईमान
और जब कभी उनके रब की निशानियों से कोई निशानी उनके पास आती है तो मुँह ही फेर लेते हैं
इरफ़ान
और जब कभी उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी उनके पास आती है तो वो उससे मुंह फेर लेते हैं
47
व इज़ा क़ी-ला लहुम अन्फिक़ू मिम्मा रज़-क़ कुमुल लाहु क़ालल लज़ीना कफरू लिल लज़ीना आमनू अनुत इमू मल लउ यशाउल लाहु अत’अमहु इन अन्तुम इल्ला फ़ी दलालिम मुबीन
ईमान
और जब उनसे फ़रमाया जाए, अल्लाह के दिए में से कुछ उस की राह में ख़र्च करो, तो काफ़िर मुसलमानों के लिए कहते हैं, के क्या हम उसे खिलाएं जिसे अल्लाह चाहता तो खिला देता, तुम तो नहीं मगर खुली गुमराही में
इरफ़ान
और जब उनसे फ़रमाया जाता है, डरो उससे जो तुम्हारे सामने है और जो तुम्हारे पीछे आने वाला है इस उम्मीद पर कि तुम पर रहम किया जाए
48
व यकूलूना मता हाज़ल व’अदू इन कुन्तुम सादिक़ीन
ईमान
और कहते हैं, कब आएगा ये वादा, अगर तुम सच्चे हो?
इरफ़ान
और कहते हैं: यह वादा कब आएगा? अगर तुम सच्चे हो (तो बताओ)
49
मा यन ज़ुरूना इल्ला सइहतउँ व़ाहि-दतन त’खुज़ुहुम वहुम यखिस्सिमून
ईमान
राह नहीं देखते मगर एक चीख़ की के उन्हें आ लेगी जब वो दुनिया के झगड़े में फंसे होंगे
इरफ़ान
वो सिर्फ एक चीख का इंतज़ार कर रहे हैं जो उन्हें उस हालत में पकड़ लेगी जब वो दुनिया के झगड़े में फंसे हुए होंगे
50
फ़ला यस्ता ती’ऊना तउसि-यतउँ वला इला अहलिहिम यरजिऊन
ईमान
तो ना वसीयत कर सकेंगे और ना अपने घर पलट कर जाएं
इरफ़ान
तो न वो वसीयत कर सकेंगे और न ही अपने घर वालों की तरफ पलट कर जा सकेंगे
51
व नुफ़िख़ा फ़िस सूरि फ़इज़ा हुम मिनल अज्दासि इला रब्बिहिम यनसिलून
ईमान
और फूंका जाएगा सूर जभी वो क़ब्रों से अपने रब की तरफ़ दौड़ते चलेंगे
इरफ़ान
और सूर में फूंक मारी जाएगी तो उसी वक़्त वो क़ब्रों से अपने रब की तरफ दौड़ते चले जाएंगे
52
क़ालू या वइलना मम ब’असना मिम मरक़दिना हाज़ा मा व’अदर रहमानु व-सदक़ल मुरसलून
ईमान
कहेंगे हाय हमारी ख़राबी किसने हमें सोते से जगा दिया, ये है वो जिसका रहमान ने वादा दिया था, और रसूलों ने हक़ फ़रमाया
इरफ़ान
कहेंगे: हाय हमारी ख़राबी! किसने हमें हमारी नींद से जगा दिया? यह वो है जिसका रहमान ने वादा किया था और रसूलों ने सच फरमाया था
53
इन कानत इल्ला सइहतउँ वहि-दतन फ़इज़ा हुम जमीउल लदइना मुहदरून
ईमान
वो तो ना होगी मगर एक चिंघाड़ जभी वो सब के सब हमारे हुज़ूर हाज़िर हो जाएंगे
इरफ़ान
वो तो सिर्फ एक चीख होगी तो उसी वक़्त वो सब के सब हमारे हुज़ूर हाज़िर कर दिए जाएंगे
54
फ़ल यउ-म ला-तुज्लमु नफ्सुन शइअउँ वला तुजज़उना इल्ला मा कुन्तुम ता’मलून
ईमान
तो आज किसी जान पर कुछ ज़ुल्म ना होगा और तुम्हें बदला ना मिलेगा, मगर अपने किए का
इरफ़ान
तो आज किसी जान पर कुछ ज़ुल्म न होगा और तुम्हें तुम्हारे आमाल ही का बदला दिया जाएगा
55
इन्न असहाबल जन नतिल यउमा फ़ी शुगुलिन फ़ाकिहून
ईमान
बेशक, जन्नत वाले आज दिल के बहलावों में चैन करते हैं
इरफ़ान
बेशक जन्नत वाले आज दिल बहलाने वाले कामों में लुत्फ़ अंदोज़ (मगन) होंगे
56
हुम व-अज्वा जुहुम फ़ी ज़िलालिन ‘अलल अराइकि मुत्तकिऊन
ईमान
वो और उनकी बीबियां सायों में हैं तख्तों पर तकिया लगाए
इरफ़ान
वो और उनकी बीवियां तख्तों पर तकिया लगाए सायों में होंगे
57
लहुम फ़ीहा फ़ाकि-हतुउँ वलहुम मा यद्-दऊन
ईमान
उनके लिए इस में मेवा है, और उनके लिए है इस में जो मांगें
इरफ़ान
उनके लिए जन्नत में फल-मेवा होगा और उनके लिए हर वो चीज़ होगी जो वो मांगेंगे
58
सलामुन क़उलम मिर रब्बिर रहीम
ईमान
उन पर सलाम होगा मेहरबान रब का फ़रमाया हुआ
इरफ़ान
उन पर मेहरबान रब की तरफ से “सलाम” फरमाया जाएगा
59
वम ताज़ुल यउमा अय्युहल मुजरिमून
ईमान
और आज अलग फट जाओ ऐ मुजरिमो
इरफ़ान
और (फरमाया जाएगा) ऐ मुजरिमो! आज अलग हो जाओ
60
अलम आ’हद इलइकुम या बनी आद-म अल्ला ता’बुदुश शइतान, इन्नहू लकुम अदुव वुम मुबीन
ईमान
ऐ औलाद-ए आदम, क्या मैंने तुम से अहद ना लिया था के शैतान को ना पूजना? बेशक, वो तुम्हारा खुला दुश्मन है
इरफ़ान
ऐ आदम की औलाद! क्या मैंने तुमसे अहद (वादा) न लिया था कि शैतान की इबादत न करना, बेशक वो तुम्हारा खुला दुश्मन है
61
व अनि’अ बुदूनी हाज़ा सिरातुम मुस्तक़ीम
ईमान
और मेरी बंदगी करना ये सीधी राह है
इरफ़ान
और ये कि मेरी ही इबादत करना, यह सीधी राह है
62
व लक़द अदल्ला मिन्कुम जिबिल्लन कसीरा, अफलम तकूनू ता’क़िलून
ईमान
और बेशक उसने तुम में से बहुत सी ख़ल्क़त को बहका दिया तो क्या तुम्हें अक़्ल नहीं थी?
इरफ़ान
और बेशक उसने तुम में से बहुत सी मखलूक को गुमराह कर दिया तो क्या तुम्हें अक्ल न थी?
63
हाज़िही जहन्नमुल लती कुन्तुम तू-‘अदून
ईमान
ये है वो जहन्नम जिसका तुमसे वा’दा था
इरफ़ान
यह वो जहन्नम है जिसका तुमसे वादा किया जाता था
64
इस्लउहल यउमा बिमा कुन्तुम तक्फुरून
ईमान
आज इस में जाओ, बदला अपने कुफ़्र का
इरफ़ान
आज इसमें दाखिल हो जाओ उस कुफ्र के बदले जो तुम करते थे
65
अल यउमा नख्तिमु ‘अला अफ्वा हिहिम व-तुकल्लिमुना अइदीहिम व-तशहदु अर-जुलुहुम बिमा कानू यक्सिबून
ईमान
आज हम उनके मुँह पर मोहर कर देंगे, और उनके हाथ हमसे बात करेंगे, और उनके पांव उनके किए की गवाही देंगे
इरफ़ान
आज हम उनके मुंह पर मुहर लगा देंगे और उनके हाथ हमसे कलाम (बात) करेंगे और उनके पांव गवाही देंगे जो कुछ वो कमाते थे
66
वलउ नशाउ लता मसना ‘अला आ’युनिहिम फ़स तबकुस सिराता फ़अन्ना युबसिरून
ईमान
और अगर हम चाहते तो उनकी आंखें मिटा देते, फिर लपक कर रास्ते की तरफ़ जाते तो उन्हें कुछ ना सूझता
इरफ़ान
और अगर हम चाहें तो उनकी आंखें मिटा दें फिर वो रास्ता देखने के लिए दौड़ें तो उन्हें कहाँ से दिखाई देगा?
67
व लउ नशाउ ल-मसखनाहुम ‘अला मका नतिहिम फमस तताऊ मुदिय्य्यउं वला यरजिऊन
ईमान
और अगर हम चाहते तो उनके घर बैठे उनकी सूरतें बदल देते, के ना आगे बढ़ सकते ना पीछे लौटते
इरफ़ान
और अगर हम चाहें तो उनके घरों पर ही उनकी सूरतें बदल दें तो न वो आगे बढ़ सकें और न लौट कर आ सकें
68
वमन नुअम मिरहु नुनक किसहु फिल खल्क, अफला या’क़िलून
ईमान
और जेसे हम बड़ी उम्र का करें उसे पैदाइश में उलटा फेरें तो क्या वो समझते नहीं
इरफ़ान
और जिसे हम बड़ी उम्र देते हैं उसे पैदाइश में उल्टा कर देते हैं, तो क्या वो अक्ल नहीं रखते?
69
वमा अल्लम नाहुश शि’अरा वमा यम्बगी लहू इन हुवा इल्ला जिकरुउँ वक़ुरआनुम मुबीन
ईमान
और हमने उनको शेर कहना नहीं सिखाया, और ना वो उनकी शान के लायक़ है वो तो नहीं मगर नसीहत और रोशन क़ुरआन
इरफ़ान
और हमने उस (नबी) को शेर (शायरी) नहीं सिखाया और न वो उनकी शान के लायक़ है, वो तो सिर्फ नसीहत और रोशन क़ुरआन है
70
लियुन जिरा मन काना हय्यउँ व यहिक़ क़ल क़उलु ‘अलल काफ़िरीन
ईमान
के उसे डराए जो ज़िंदा हो और काफ़िरों पर बात साबित हो जाए
इरफ़ान
ताकि उसे डराए जो ज़िंदा हो और काफिरों पर अज़ाब की बात साबित हो जाए
71
अ-व लम यरउ अन्ना ख़लक्ना लहुम मिम्मा अमिलत अय्दीना अन’आमन फ़हुम लहा मालिकून
ईमान
क्या उन्होंने नहीं देखा के हमने अपने हाथ के बनाए हुए चौपाए उनके लिए पैदा किए तो ये उनके मालिक हैं
इरफ़ान
और क्या उन्होंने न देखा कि हमने उनके लिए अपने हाथ की बनाई हुई चीज़ों में से चौपाए (जानवर) पैदा किए तो वो उनके मालिक हैं
72
व ज़ल ललनाहा लहुम फमिन्हा रकूबुहुम वमिन्हा या,कुलून
ईमान
और उन्हें उनके लिए नर्म कर दिया तो किसी पर सवार होते हैं और किसी को खाते हैं
इरफ़ान
और उन्हें उनके लिए ताबे (वश में) कर दिया तो उनमें से किसी पर वो सवार होते हैं और किसी को वो खाते हैं
73
व लहुम फ़ीहा मनाफ़िउ व-मशारिबु अ-फ़ला यश्कुरून
ईमान
और उनके लिए इन में कई तरह के नफ़ा और पीने की चीज़ें हैं तो क्या शुक्र ना करेंगे?
इरफ़ान
और उनके लिए उनमें कई फायदे और पीने की चीज़ें हैं, तो क्या वो शुक्र अदा नहीं करते?
74
वत त-ख़जू मिन दूनिल्लाहि आलि-हतल ल’अल्लहुम युन्सरून
ईमान
और उन्होंने अल्लाह के सिवा और ख़ुदा ठहरा लिए, के शायद उनकी मदद हो
इरफ़ान
और उन्होंने अल्लाह के सिवा और माबूद बना लिए ताकि उनकी मदद की जाए
75
ला-यस ततीऊना नसरहुम वहुम लहुम जुन्दुम मुह्दरुन
ईमान
वो उनकी मदद नहीं कर सकते और वो उनके लश्कर सब गिरफ़्तार हाज़िर आएंगे
इरफ़ान
वो उनकी मदद की ताक़त नहीं रखते और वो (बुत) उनके लिए लश्कर बनकर हाज़िर किए जाएंगे
76
फ़ला यह्ज़ुन्का क़उलुहुम, इन्ना ना’लमु मा युसिर रूना वमा यु’लिनून
ईमान
तो तुम उनकी बात का ग़म ना करो, बेशक हम जानते हैं जो वो छुपाते हैं और ज़ाहिर करते हैं
इरफ़ान
तो उनकी बात तुम्हें ग़मगीन न करे, बेशक हम जानते हैं जो वो छिपाते हैं और जो वो ज़ाहिर करते हैं
77
अ-व लम यरल इंसानु अन्ना ख़लक्नाहु मिन नुत्फ़तिन फ़इज़ा हुवा ख़सीमुम मुबीन
ईमान
और क्या आदमी ने ना देखा के हमने उसे पानी की बूंद से बनाया जब भी वो सरीह झगड़ालू है
इरफ़ान
और क्या आदमी ने न देखा कि हमने उसे पानी की एक बूंद से पैदा किया तो जभी वो खुला झगड़ने वाला बन गया
78
व द-रबा लना मसलउँ व नसिया खल्क़ह, क़ाला मइ युहयिल इज़ामा वहिया रमीम
ईमान
और हमारे लिए कहावत कहता है और अपनी पैदाइश भूल गया बोला ऐसा कौन है के हड्डियों को ज़िंदा करे जब वो बिल्कुल गल गईं
इरफ़ान
और उसने हमारे लिए एक मिसाल बयान की और अपनी पैदाइश भूल गया, बोला: हड्डियों को कौन ज़िंदा करेगा जबकि वो बिलकुल बोसीदा (गली हुई) हैं?
79
कुल युहयीहल लज़ी अनशअहा अव्वला मर्रह, वहुवा बिकुल लि ख़ल्क़िन अलीम
ईमान
तुम फ़रमाओ उन्हें वो ज़िंदा करेगा जिसने पहली बार उन्हें बनाया और उसे हर पैदाइश का ‘इल्म है
इरफ़ान
तुम फरमाओ: उन्हें वो ज़िंदा करेगा जिसने पहली बार उन्हें बनाया और वो हर पैदाइश को खूब जानने वाला है
80
अल्लज़ी ज’अला लकुम मिनश श-जरिल अख़दरि नारन फ़इज़ा अन्तुम मिन्हु तूक़िदून
ईमान
जिसने तुम्हारे लिए हरे पेड़ में से आग पैदा की जब भी तुम उसे सुलगाते हो
इरफ़ान
वो जिसने तुम्हारे लिए हरे दरख़्त से आग पैदा की तो जभी तुम उससे (आग) सुलगाते हो
81
अ-व लइसल लज़ी ख-लक़स समावाति वल अरदा बिक़ादिरिन ‘अला अय्ंयख्लुक़ा मिस्लहुम बला वहुवल खल्लाक़ुल अलीम
ईमान
और क्या वो जिसने आसमान और ज़मीन बनाए, उन जेसे और नहीं बना सकता क्यों नहीं, और वही है बड़ा पैदा करने वाला सब कुछ जानता है
इरफ़ान
और क्या वो जिसने आसमान और ज़मीन बनाए इस पर क़ादिर नहीं कि उन जैसे और पैदा कर दे? क्यों नहीं, और वही बड़ा पैदा करने वाला, सब कुछ जानने वाला है
82
इन्नमा अमरुहू इज़ा अरादा शइअन अय्ंयक़ूला लहू कुन फ़-यकून
ईमान
उस का काम तो यही है के जब किसी चीज़ को चाहे तो उस से फ़रमाए हो जा, वो फ़ौरन हो जाती है
इरफ़ान
उसका काम तो यही है कि जब किसी चीज़ का इरादा फरमाता है तो उससे फरमाता है “हो जा” तो वो हो जाती है
83
फ़सुब हानल लज़ी बि-यदिही म-लकूतु कुल्लि शइ-इउँ व इलइहि तुरजऊन
ईमान
तो पाकी है उसे जिसके हाथ हर चीज़ का क़ब्ज़ा है, और इसी की तरफ़ फेरे जाओगे
इरफ़ान
तो पाक है वो जिसके हाथ में हर चीज़ का क़ब्ज़ा है और उसी की तरफ तुम फेरे जाओगे
सूरह यासीन शरीफ़ हिंदी में पढ़ने के लिए ऊपर पूरी आयतें हिंदी तर्जुमे के साथ दी गई हैं। बहुत से लोग रोज़ाना Yaseen Sharif Hindi mein या Yaseen Sharif Hindi mein पढ़ना पसंद करते हैं, ख़ासकर जुमे के दिन। अगर आप Surah Yaseen in Hindi या Surah Yaseen Hindi me ढूंढ रहे थे, तो ये पेज हर आयत आसान हिंदी में पढ़ने की सुविधा देता है।
Yaseen Sharif हिंदी में कैसे पढ़ें?
ऊपर दी गई हर आयत के साथ उसका हिंदी तर्जुमा भी मौजूद है, ताकि Surah Yaseen Hindi me आसानी से समझी जा सके।
सूरह यासीन हिंदी में पढ़ने के लिए क्या ज़रूरी है?
कोई खास शर्त नहीं — Yaseen Sharif Hindi mein पढ़ने के लिए बस नियत और तवज्जो काफ़ी है।
क्या Surah Yaseen Hindi mein तर्जुमे के साथ मिल सकती है?
जी हाँ, इस पेज पर सूरह यासीन हिंदी में तर्जुमे के साथ मौजूद है।
अल्लाह हम सबको इस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए, आमीन।


Masa allah
Subhan Allah
Subhanallah
Mashallah Subhanllah
MashaAllah
MashaAllah